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अंजलि नैलवाल की कविताएँ
मैं गाँव सोचकर सबसे पहले
लोगों को नहीं सोच पाती
मैं नहीं समझ पाती कि मैं लोगों से हूँ
या पत्थरों-पहाड़ो से,
गाँव लोगों से है या बस अपने होने से।


अम्मी और अतिथि
मुझे ठीक से पता नहीं कि विधवा क्या होती है, लेकिन जब पड़ोसी मुझे "विधवा की बेटी" कहते हैं तब मुझे लगता है कि वह जरूर विधवा होंगी। दूसरे सभी बच्चों के पिता हैं, लेकिन मेरे कोई पिता नहीं हैं। शायद मेरे पिता न होने के साथ माँ के विधवा होने का कोई संबंध हो।


नींद
मूल कहानी : हारुकी मुराकामी अनुवाद : श्रीविलास सिंह बिना नींद के यह मेरा लगातार सत्रहवाँ दिन है। मैं अनिद्रा रोग के संबंध में बात नहीं कर रही हूँ। मैं जानती हूँ अनिद्रा रोग क्या होता है। मुझे इस तरह का कुछ काॅलेज के दिनों में हुआ था- ‘इस तरह का कुछ’ इसलिए क्योंकि मैं निश्चित नहीं हूँ कि तब जो हुआ था वह ठीक-ठीक वही था जिसे लोग अनिद्रा रोग कहते हैं। मैं सोचती हूँ कि एक डॉक्टर मुझे इस संबंध में बता सकता था। लेकिन मैं किसी डॉक्टर के पास नहीं गई। मैं जानती थी कि इससे कोई फायदा न
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