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हैडमास्टर हृदयराम
हैडमास्टर हृदय राम की दंडिका पूत-कुपूत की पहचान करवा देती है। जो काबिल होगा, वह टिक जाएगा और लंपट तो भाग ही जाएगा। उनकी दंडिका बिल्कुल हंस न्याय करती। दूध अलग और पानी अलग। उनकी दंडिका सूप की तरह कूड़ा करकट बाहर फेंकती और असल तत्व बचाकर रखती।


बाकुम-बाकुम
रानी उसे क्या काम सुझाती? सोच में पड़ गई। पूरा समाज इसी काम में डूबा है। पैसे भी आ रहे हैं। कौन छोड़ेगा भला? गैर-कानूनी काम होते हुए भी ये धंधा फलफूल रहा है। किसी को पुलिस, थाने का डर ही नहीं। धमकी से भी इन लोगो पर असर नहीं पड़ेगा। बहुत निरुपाय महसूस कर रही थी।


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