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ख़बरों से बाहर ग़ज़ा (पुस्तक समीक्षा)
शरणार्थी होना केवल अपना भूगोल खो देना नहीं है। यह धीरे-धीरे अपनी रोज़मर्रा की स्वायत्तता खो देना भी है। खाना कब मिलेगा, राशन कब बँटेगा, काम मिलेगा या नहीं, बच्चे के लिए कपड़ा आएगा या नहीं—जीवन के सबसे साधारण निर्णय भी किसी दूसरी व्यवस्था की अनुमति पर टिक जाते हैं।


कच्चे दूध की गंध (चीनी कहानी)
जब उनका चेहरा खुशी से दमकता तो उनके मुँह के दोनों छोरों पर डिंपल उभर आते—नई-नवेली माँ बनने का आह्लाद और गर्व उनके चेहरे से फूटा पड़ता था। उनके आसपास से जो भी गुजरता, उसे माँ के ताजे दूध की भीनी-भीनी गंध अपने आगोश में ले लेती।
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