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रामदरश मिश्र : सहजता जहाँ एक काव्य निकष है
रामदरश मिश्र अपने राजनीतिक होने का शोर नहीं करते। उनकी कविताएं भी किसी प्रकार का शोर नहीं करतीं। एक कवि के रूप में वे अपने आरंभिक दिनों से आश्वस्त हैं कि इस तरह का कोई भी शोर अंततः एक साहित्यिक प्रदूषण है।


दुन्या मिखाइल की कविताएँ
लालटेनें रात की सच्ची मुरीद हैं
उनमें सितारों से ज़्यादा सब्र है
वे जलती रहती हैं सुबह तक।


इस दुनिया को बचाने के लिए
हर घर शुरू में बच्चों वाला घर होता है, फिर धीरे-धीरे बिना बच्चों वाले घर में बदल जाता है। बच्चे बड़े होकर एक नए घर की तलाश में बाहर निकल जाते हैं जहाँ वे अपने खोए हुए बचपन को इत्मीनान से याद कर अपने भीतर जन्मे दु:ख को महसूस कर सकें। यह जीवन की एक नियति है। जीवन का एक निर्धारित क्रम।
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