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मुझे एक और चाबी चाहिए
कवि और चोर के बीच की दूरी बहुत कम होती है। दोनों ही अदृश्य होकर दूसरों के जीवन के सबसे निजी हिस्सों में प्रवेश करते हैं। फ़र्क बस इतना है कि चोर भौतिक चीजों को ले जाता है, और कवि उन अमूर्त सत्यों को चुराता है, जिन्हें लोग खो चुके होते हैं अथवा खो देने का अभिनय करते हैं।


अनिल गंगल की कविताएँ
किसके खेत में भूख उगती है?
किसके घर में नफ़रत पकती है?
किसकी ज़ुबान पर ताला लगता है?
और किसके हाथ में इतनी ताक़त आ जाती है
कि वह अपने झूठ को देश का सच कह सके?


पैमाना सिर्फ़ एक है कि लिखाई अच्छी होनी चाहिए
मैं नहीं मानती कि स्त्रीवाद कभी भी ‛पूँजीवाद’ जैसी किसी भी दूसरों के दमन और शोषण पर आधारित व्यवस्था का समर्थक हो सकता है।
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