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चेस्लाव मिलोश की कविताएँ
नदियों के नाम रह जाते हैं तुम्हारे साथ।
कैसी अंतहीन लगती हैं वे नदियाँ!
तुम्हारे खेत हो जाते हैं बंजर
बदल जाता है शहर की मीनारों का रूप
तुम खड़े रह जाते हो किनारे, निःशब्द।


बाबूजी की साइकिल (संस्मरण)
प्यारी साइकिल न जाने किस दिन अज्ञात पथ पर विदा हो गयी। मुझे भी नहीं पता। मेरी स्मृतियों में पिताजी मुस्कुराते हुए साइकिल से घर लौट रहे हैं।


प्रेम और युद्ध (वियतनामी कहानी)
युद्ध को माफ कर दो। हर उस चीज़ को माफ़ कर दो जो हमारी यादों को नष्ट करती है। या हमें याद न रखने की वजह बनती है। या हमें पीड़ा पहुँचाती है।
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